Lalsa Di Chakki – Janiye Apni Galti ka Ehsas Kese Hua Lalchi Insan Ko

दोस्तों आज की कहानी से बोहुत कुछ सीखने को मिलेगा और कहानी है Lalsa Di Chakki 

Lalsa Di Chakki

Lalsa di chakki

दोस्तों पुराने समय की बात है | एक बोहोत ही लालची इंसान रहता था | उसने साधु संतो की बोहोत सेवा की थी | बस उस इंसान की सेवा देखकर संत ने 4 दीया दिए और जलाने को कहा | पहला दिया देने के बाद कहा इसको पूरब दिशा की और ले कर जाना जहा बुझ जाये जमीन खोद देना तुम्हे बोहोत धन मिलेगा

 

दूसरा दीया देने के बाद ” उन्होंने कहा इसको पक्षिम  दिशा की और ले जाना | अगर दीया बुझ जाये तो जमीन खोद देना | वहाँ तुम्हे उससे भी ज्यादा धन मिलेगा | उन्होंने कहा अगर फिर भी और धन की इच्छा है | तो ये तीसरा दीया लो और इससे  दक्षिण दिशा की और ले जाना यहाँ तुम्हे बोहोत धन मिलेगा वो भी पहले से ज्यादा |

अब आखिरी दिया बच गया था : उन्होंने उस लालची इंसान को आखिरी दिया देने के बाद कहा की इस दीया को उत्तर दिशा की और मत ले जाना और न ही जलाना | ये सब कहने के बाद संत चले गए|

फिर उस लालची इंसान ने पहला दीया जलाया और उसको पूरब दिशा की और ले जाने लगा | जैसे ही दीया बुझा उसने जमीन खोदी जिसमे उसको बोहोत धन मिला | पर उसने उस धन को वही रहने दिया और खुश हुआ | उसने सोचा जब यहाँ इतना धन है बाकि दिशा में इससे बोहोत ज्यादा धन होगा | पहले सब दिशा में धन देख लेता हु |

फिर वो पक्षिम  दिशा की और गया दीया जलाकर जैसे ही दीया बुझा और उसने जमीन खोदी उसको वहाँ खूब सारा सोना मिला | पर वो था बोहोत लालची उसने उस धन को भी वहाँ रहने दिया | उसने सोचा जहा सबसे ज्यादा है वहाँ देख लेते है | फिर सब दिशाओं का धन लेकर घर चले जाऊंगा | फिर तीसरा दीया जलाया उसने और दक्षिण दिशा की और ले जाने लगा |

जैसे ही दीया बुझा उसने जमीन खोदी तो उसको हीरे मिले बोहोत सारे | पर वो लालची इंसान को इतने में भी संतुष्टि ना मिली | अब आखिरी दीया बच गया था और संतो ने बोल दिया था की इस दीया को उत्तर दिशा की और मत ले जाना और न जलाना | पर उस लालच में अंधे इंसान को वो बात याद नहीं आयी और उसने दीया को जलाया और उत्तर दिशा की और ले गया |

जैसा ही दीया बुझा उसको एक महल दिखा वो बोहोत खुश हुआ | उसने सोचा की ये महल भी अब उसका ही है | वो महल के हर कमरे में गया और हर कमरा सोना और हीरे से भरा हुआ था | फिर उसको आवाज सुनाई दी चक्की चलने की | जहा से आवाज आयी वो वहाँ गया उसने देखा की एक बूढ़ा इंसान चक्की चला रहा है | उस लालची इंसान ने बूढ़े से कहा की तुम इस महल में क्या कर रहे हो |

बूढ़े इंसान से कहा बतायूंगा पर पहले तू ये चक्की चला : उस लालची इंसान ने चक्की चलानी सुरु कर दी | और बूढ़ा इंसान जोर जोर से हसने लगा : वो लालची इंसान बूढ़े इंसान की तरफ देखने लगा और चक्की बंद करने वाला था बूढ़े इंसान ने कहा रुक जा | चक्की बंद मत कर अब ये महल तेरा है | पर तब है जब तक ये चक्की चलती रहेगी: और तू इस चक्की को बंद मत करना | वर्ना ये महल गिर जायेगा और तू इसमें दब कर मर जायेगा

वो लालची इंसान रोने लगा और कहा उस बूढ़े इंसान से मेरा इस चक्की से कैसे छुटकारा होगा | उसने कहा मेरी सारी जवानी इस चक्की को चलाकर चली गयी | क्युकी मेने भी तेरी तरह संतो की बात नहीं मानी और जब तक मेरी और तेरी तरह कोई लालच में अँधा इंसान नहीं आएगा तब तक तू इस चक्की से छुटकारा नहीं पा सकेगा | लालची इंसान ने बूढ़े से कहा की अब तू बाहार जाकर क्या करेगा : उसने कहा में सब लोगो को कहूंगा लालच बुरी बला है |

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